
देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय में कटे होंठ और कटे तालू की जन्मजात समस्या से जूझ रहे 14 दिन के नवजात को विशेष फीडिंग प्लेट उपलब्ध कराई गई, जिससे अब शिशु बोतल से आसानी से दूध पी पा रहा है। प्रसव के बाद, शल्य विभाग (प्लास्टिक सर्जरी ) से दंत चिकित्सा विभाग में रेफर किए गए शिशु का परीक्षण विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अमित शाह ने किया।
तालू में दरार के कारण शिशु को दूध पीने में कठिनाई हो रही थी इसके समाधान के लिए सहायक प्रोफेसर डॉ. योगेश्वरी ने विशेष तकनीक से इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर में शिशु के मुंह का इम्प्रेशन लिया। इस दौरान सीनियर रेजिडेंट डॉ. ज्योत्सना तथा एनेस्थीसिया टीम से डॉ. त्रिलोक और डॉ. निहारिका उपस्थित रहे, प्रोसीजर से पूर्व बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ अशोक द्वारा शिशु का परीक्षण किया गया । इसके बाद विशेष फीडिंग प्लेट तैयार कर शिशु को दी गई,माता-पिता को इसके उपयोग और सफाई संबंधी निर्देश भी दिए गए। यह उपकरण दूध पीने में सहायता, पर्याप्त पोषण और वजन बढ़ाने में मदद करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में उपचार तीन चरणों में किया जाता है—प्रारंभिक पोषण एवं परामर्श, आवश्यकतानुसार कटे होंठ की सर्जरी 3–6 माह और कटे तालू की सर्जरी 6–12 माह की आयु में, तथा आगे चलकर स्पीच थेरेपी और ऑर्थोडॉन्टिक जांच। समय पर उपचार और जागरूकता से बच्चों के स्वस्थ विकास में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
