देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने आज ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए कम रक्तदान, डोनर्स को आवश्यकता पड़ने पर रक्त उपलब्ध न कराए जाने तथा अन्य व्यवस्थागत कमियों पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्काल सुधार हेतु सख्त निर्देश दिए।

प्राचार्या ने स्पष्ट किया कि ब्लड बैंक की व्यवस्था संवेदनशील और जीवनरक्षक सेवा है, जिसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या असंवेदनशीलता कतई स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों एवं लावारिस/असहाय रोगियों को मानवीय आधार पर बिना डोनेशन के रक्त उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।

साथ ही उन्होंने निर्देशित किया कि पंजीकृत रक्तदाता संस्थाओं के सदस्यों को भी आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा अधीक्षक के अनुमोदन के आधार पर निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाए। इस संबंध में यह सुनिश्चित किया जाए कि वास्तविक रक्तदाताओं को उनके जरूरत के समय किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

प्राचार्या ने यह भी कहा कि इस प्रकार की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि रक्तदाताओं को आवश्यकता पड़ने पर रक्त उपलब्ध नहीं कराया गया, जो अत्यंत गंभीर विषय है और ऐसी पुनरावृत्ति होने पर जिम्मेदारों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने शाम के समय रक्तदान की व्यवस्था न होने पर भी कड़ी आपत्ति जताई और निर्देश दिया कि ब्लड बैंक में पूरे समय सक्रिय रूप से रक्तदान की सुविधा उपलब्ध रहनी चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल सहायता मिल सके।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टाफ को भी निर्धारित नियमों के अनुसार ही रक्त उपलब्ध कराया जाए और बिना डोनेशन के अनावश्यक रूप से रक्त निर्गत न किया जाए।
अनिवार्य रूप से महीने में कम से कम 6 से 8 ब्लड कैम्प कराना सुनिश्चित करें
अंत में प्राचार्या ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, संवेदनशीलता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करें तथा मरीजों और रक्तदाताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *