देहरादून। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. अजय कुमार आर्य ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों, चिकित्सा अधीक्षकों, पीआरओ, एपीआरओ तथा मेडिकल सोशल वेलफेयर ऑफिसरों के साथ मंगलवार देर सांय आनलाइन महत्वपूर्ण बैठक कर मरीज हित से जुड़े कई बड़े निर्देश जारी किए।

बैठक का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और त्वरित बनाना रहा।बैठक में चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट कहा कि शासन द्वारा पूर्व में जारी किए गए जीओ का हर हाल में पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अस्पतालों से मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया पर विशेष सख्ती दिखाते हुए कहा कि बिना ठोस कारण किसी भी मरीज को रेफर नहीं किया जाना चाहिए। यदि रेफर किया जाता है तो उसका स्पष्ट कारण दर्ज होना अनिवार्य होगा।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी मेडिकल कॉलेज प्रतिदिन रेफर मरीजों और अस्पताल में हुई मृत्यु की रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा निदेशक कार्यालय को भेजेंगे। इस कार्य में मेडिकल कॉलेजों के असिस्टेंट प्रोफेसरों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी ताकि रिपोर्टिंग और निगरानी व्यवस्था मजबूत हो सके।

बैठक में यह भी तय किया गया कि अस्पतालों में तैनात मेडिकल सोशल वेलफेयर ऑफिसरों (MSW) की व्यवस्थित ड्यूटी रोस्टर तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य यह रहेगा कि किसी भी समय मरीजों और उनके परिजनों को सहायता की आवश्यकता होने पर तत्काल संबंधित अधिकारी से संपर्क किया जा सके।इसके साथ ही प्राचार्यों ने पीआरओ और एपीआरओ पदों के सृजन की मांग भी जोरदार तरीके से उठाई गई।

अधिकारियों ने बताया कि इन पदों के सृजन का प्रस्ताव पहले ही शासन को भेजा जा चुका है माना जा रहा है कि जल्द में मेडिकल कॉलेजों में जनसंपर्क व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा क्यूंकि मरीज सेवा को साथ अस्पतालों के कार्यो का प्रचार प्रसार भी जरूरी है।

पीआरओ का दायित्व संस्थान और जनसामान्य के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करना, सूचना प्रबंधन करना और संस्थान की छवि को सुदृढ़ बनाना होता है। यदि मेडिकल कॉलेजों में पीआरओ की नियुक्ति होती है, तो इससे न केवल संस्थानों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी, बल्कि आम जनता के बीच सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की एक सशक्त और भरोसेमंद छवि भी स्थापित होगी।

चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. अजय कुमार आर्य ने सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय बढ़ाते हुए चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी। बैठक के दौरान मरीज हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने, रेफर प्रणाली को मजबूत करने, इमरजेंसी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने तथा अस्पतालों में अनुशासन कायम रखने के लिए लिए गए ये फैसले स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं।

इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू होने से पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को काफी राहत मिलेगी तथा गंभीर मरीजों का उपचार पहले से अधिक व्यवस्थित और तेज़ी से हो सकेगा। इस अवसर पर अपर निदेशक डॉ रविन्द्र बिष्ट सहित सभी कालेजों के प्राचार्य और अधिकारी आनलाइन जुड़े थे।

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के निर्देश पर मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मरीजों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी संस्थानों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए रेफर प्रणाली, इमरजेंसी सेवाओं और मरीज सहायता व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा, ताकि किसी भी मरीज को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *